सोमवार, 12 जनवरी 2009

प्यारी सी लड़की


जहाँ का प्यार समेटे

स्नेह की चादर लपेटे

दिखने में भोली सी/वो प्यारी सी

पल में चंचलता

पल में गंभीरता

बैटन की सयानी

बैटन से अज्ञानी/वो प्यारी सी लडकी


माँ की प्यारी

बाप की दुलारी

स्वयं नाचती

सब को नाचती/वो प्यारी सी लडकी


कठपुतली सी

उछल- कूद करती सदा

कभी हंसाती

कभी रुलाती/वो प्यारी सी लडकी।


आश्वस्त करती सभी को

भविष्य अपना संवारती

बस्ता ले स्कूल को जाती/वो मेरी प्यारी सी लड़की।


-संत कुमार मालवीय संत


3 टिप्‍पणियां:

  1. मालवीय जी,

    लड़की बड़ी प्यारी सी होती हैं. बहुत अच्छा लिखा है.
    माँ की प्यारी
    बाप की दुलारी
    स्वयं नाचती
    सब को नाचती/वो प्यारी सी लडकी

    मुकेश कुमार तिवारी
    यदि आप पसंद करें तो आप मेरे ब्लॉग "कवितायन" पर मेरी एक कविता " लड़कियाँ तितली सी होती हैं " देखियेगा.

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  2. आपका स्वागत है इस ब्लोगिग ससार मे। नियमित लिखते रहे,पढते रहे, हसते रहे, कभी मोका मिले तो हमारे ब्लोग पर भी चाय-नास्ता करने आये,

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  3. बहुत ही सुंदर भाव. स्वागत ब्लॉग परिवार और मेरे ब्लॉग पर भी. (gandhivichar.blogspot.com)

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