जहाँ का प्यार समेटे
स्नेह की चादर लपेटे
दिखने में भोली सी/वो प्यारी सी
पल में चंचलता
पल में गंभीरता
बैटन की सयानी
बैटन से अज्ञानी/वो प्यारी सी लडकी
माँ की प्यारी
बाप की दुलारी
स्वयं नाचती
सब को नाचती/वो प्यारी सी लडकी
कठपुतली सी
उछल- कूद करती सदा
कभी हंसाती
कभी रुलाती/वो प्यारी सी लडकी।
आश्वस्त करती सभी को
भविष्य अपना संवारती
बस्ता ले स्कूल को जाती/वो मेरी प्यारी सी लड़की।
-संत कुमार मालवीय संत

मालवीय जी,
जवाब देंहटाएंलड़की बड़ी प्यारी सी होती हैं. बहुत अच्छा लिखा है.
माँ की प्यारी
बाप की दुलारी
स्वयं नाचती
सब को नाचती/वो प्यारी सी लडकी
मुकेश कुमार तिवारी
यदि आप पसंद करें तो आप मेरे ब्लॉग "कवितायन" पर मेरी एक कविता " लड़कियाँ तितली सी होती हैं " देखियेगा.
आपका स्वागत है इस ब्लोगिग ससार मे। नियमित लिखते रहे,पढते रहे, हसते रहे, कभी मोका मिले तो हमारे ब्लोग पर भी चाय-नास्ता करने आये,
जवाब देंहटाएंबहुत ही सुंदर भाव. स्वागत ब्लॉग परिवार और मेरे ब्लॉग पर भी. (gandhivichar.blogspot.com)
जवाब देंहटाएं